मैं चाहता हूँ कि सैं-दोमिंग में स्वतंत्रता और समानता का राज हो।
मैं चाहता हूँ कि सैं-दोमिंग में स्वतंत्रता और समानता का राज हो।
इसी लेखक के और इनसे जुड़े विषयों पर।
हर सूदख़ोर और बदमाश कुछ सिक्कों में अपने लिए ‘महान जन-देशभक्त’ की उपाधि ख़रीद सकता था।
युद्ध का प्रचार अंततः मनुष्यों की जगह शैतानी अमूर्तताओं को रखने तक सिमट जाता है।