यदि तुम्हें न्याय, सत्य, संयम और धैर्य से बेहतर कुछ मिले, तो पूरी आत्मा से उसकी ओर मुड़ो। पर यदि कुछ बेहतर न मिले, तो किसी और चीज़ को जगह मत दो।
यदि तुम्हें न्याय, सत्य, संयम और धैर्य से बेहतर कुछ मिले, तो पूरी आत्मा से उसकी ओर मुड़ो। पर यदि कुछ बेहतर न मिले, तो किसी और चीज़ को जगह मत दो।
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किसी मनुष्य के साथ ऐसा कुछ नहीं होता जिसे सहने के लिए प्रकृति ने उसे न बनाया हो।
बदला लेने का सबसे अच्छा तरीक़ा यह है कि अन्याय करने वाले जैसे न बनो।