प्रतिभा उस लक्ष्य को भेदती है जिसे कोई और भेद नहीं सकता; मेधा उस लक्ष्य को भेदती है जिसे कोई और देख नहीं सकता।
प्रतिभा उस लक्ष्य को भेदती है जिसे कोई और भेद नहीं सकता; मेधा उस लक्ष्य को भेदती है जिसे कोई और देख नहीं सकता।
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हर मनुष्य अपनी दृष्टि की सीमाओं को संसार की सीमाएँ मान लेता है।
बहुत दुखी न होने का सबसे सुरक्षित तरीक़ा है बहुत सुखी होने की अपेक्षा न करना।