मैं सचमुच नहीं जानता कि मनुष्य जीवन में जिस रेंगने से अपनी पहली गति शुरू करता है, वह व्यावहारिक जीवन का एक प्रकार का अभ्यास तो नहीं।
मैं सचमुच नहीं जानता कि मनुष्य जीवन में जिस रेंगने से अपनी पहली गति शुरू करता है, वह व्यावहारिक जीवन का एक प्रकार का अभ्यास तो नहीं।
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यदि किसी लेखक का अतीत भद्दा हो, तो उसका जीवनीकार उसे ढकने के लिए हज़ार क़िस्से गढ़ लेगा।