ब्रानिस्लाव नुशिच

पहले तुम उसे लिखने तक स्वयं को सताते हो, फिर छापने के लिए संपादक को… फिर आरोप लगाने के लिए सरकारी वकील को और अंत में सज़ा देने के लिए न्यायाधीश को।

ब्रानिस्लाव नुशिच, 1864–1938
पहले तुम उसे लिखने तक स्वयं को सताते हो, फिर छापने के लिए संपादक को… फिर आरोप लगाने के लिए सरकारी वकील को और अंत में सज़ा देने के लिए न्यायाधीश को। — ब्रानिस्लाव नुशिच

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