पहले तुम उसे लिखने तक स्वयं को सताते हो, फिर छापने के लिए संपादक को… फिर आरोप लगाने के लिए सरकारी वकील को और अंत में सज़ा देने के लिए न्यायाधीश को।
पहले तुम उसे लिखने तक स्वयं को सताते हो, फिर छापने के लिए संपादक को… फिर आरोप लगाने के लिए सरकारी वकील को और अंत में सज़ा देने के लिए न्यायाधीश को।
इसी लेखक के और इनसे जुड़े विषयों पर।
यदि किसी लेखक का अतीत भद्दा हो, तो उसका जीवनीकार उसे ढकने के लिए हज़ार क़िस्से गढ़ लेगा।