तुम्हारे लिए अच्छा होगा, नौजवान, कि तुम न लिखो। लिखने ने ही तुम्हें जेल पहुँचाया है। अगर तुम अनपढ़ होते, तो आज शायद एक भले, ईमानदार आदमी और शायद सम्मानित नागरिक होते, पर अब तुम जुआरी की तरह एक जेल से दूसरी जेल घिसटते फिरते हो।
तुम्हारे लिए अच्छा होगा, नौजवान, कि तुम न लिखो। लिखने ने ही तुम्हें जेल पहुँचाया है। अगर तुम अनपढ़ होते, तो आज शायद एक भले, ईमानदार आदमी और शायद सम्मानित नागरिक होते, पर अब तुम जुआरी की तरह एक जेल से दूसरी जेल घिसटते फिरते हो।
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यदि किसी लेखक का अतीत भद्दा हो, तो उसका जीवनीकार उसे ढकने के लिए हज़ार क़िस्से गढ़ लेगा।