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दुनिया बदलने वालों के शब्द: विचारक, वैज्ञानिक, लेखक और राजनेता।

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सारा युद्ध छल पर आधारित है।

सुन त्ज़ु

वहाँ आगे बढ़ो जहाँ तुम्हें कोई रोक न सके; वहाँ पीछे हटो जहाँ तुम्हें कोई पकड़ न सके।

सुन त्ज़ु

जो पहले मैदान में पहुँचकर शत्रु की प्रतीक्षा करता है, वह लड़ने के लिए तरोताज़ा रहता है; जो बाद में पहुँचकर युद्ध के लिए दौड़ता है, वह थककर पहुँचता है।

सुन त्ज़ु

किसी शासक को केवल अपना क्रोध शांत करने के लिए सेना मैदान में नहीं उतारनी चाहिए; किसी सेनापति को केवल चिढ़ में युद्ध नहीं करना चाहिए।

सुन त्ज़ु

हर युद्ध में सीधी विधि से लड़ाई शुरू की जा सकती है, पर जीत पक्की करने के लिए अप्रत्यक्ष विधियों की ज़रूरत होगी।

सुन त्ज़ु

विजयी सेना पहले जीत पक्की करती है और फिर युद्ध खोजती है; हारी सेना पहले लड़ती है और फिर जीत खोजती है।

सुन त्ज़ु

वही जीतेगा जो जानता है कि कब लड़ना है और कब नहीं लड़ना।

सुन त्ज़ु

अच्छी सेना पहले स्वयं को अजेय बनाती है, फिर उस क्षण की प्रतीक्षा करती है जब शत्रु को हराया जा सके।

सुन त्ज़ु

अपने को हार से बचाना हमारे हाथ में है, पर शत्रु को हराने का अवसर स्वयं शत्रु देता है।

सुन त्ज़ु

यदि मैं सीधा हूँ, तो लोग बिना आदेश के काम करेंगे। यदि मैं सीधा नहीं हूँ, तो आदेश देने पर भी नहीं मानेंगे।

कन्फ़्यूशियस, 551–479 ई.पू.

पहले मैं लोगों की बातें सुनकर उनके आचरण पर भरोसा कर लेता था। अब मैं उनकी बातें सुनता हूँ और उनका आचरण देखता हूँ।

कन्फ़्यूशियस, 551–479 ई.पू.

प्राचीन लोग सहज ही नहीं बोलते थे, क्योंकि उन्हें लज्जा होती थी कि कहीं उनके कर्म उनके शब्दों तक न पहुँच पाएँ।

कन्फ़्यूशियस, 551–479 ई.पू.

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