संग्रह

उद्धरण

दुनिया बदलने वालों के शब्द: विचारक, वैज्ञानिक, लेखक और राजनेता।

432 उद्धरण

न्याय

सिपाहियों को हमने सरदार बना दिया, मूर्खों ने पदवियाँ बाँट लीं, चोर हमारे लिए धनवान गढ़ रहे हैं, अँधेरी आत्माओं ने स्वयं को देशभक्त कहा।

व्लादिस्लाव पेत्कोविच दिस, 1880–1917

हर किसी को यह कहने का अधिकार है कि वह क्या सोचता है, पर ऐसा कोई क़ानून नहीं जो किसी को सुनने के लिए विवश करे।

एफ़्रेम किशोन, 1924–2005

हर सूदख़ोर और बदमाश कुछ सिक्कों में अपने लिए ‘महान जन-देशभक्त’ की उपाधि ख़रीद सकता था।

रादोये दोमानोविच, 1873–1908

उदार क़ानून बहुत थे, और स्वतंत्रता ज़रा भी नहीं।

रादोये दोमानोविच, 1873–1908

युद्ध का प्रचार अंततः मनुष्यों की जगह शैतानी अमूर्तताओं को रखने तक सिमट जाता है।

ऑल्डस हक्सले, 1894–1963

प्रचारक का उद्देश्य लोगों के एक समूह को यह भुला देना है कि कुछ दूसरे समूहों के लोग भी मनुष्य हैं।

ऑल्डस हक्सले, 1894–1963

साध्य साधनों को उचित नहीं ठहरा सकता, इस सरल और स्पष्ट कारण से कि प्रयुक्त साधन ही प्राप्त साध्यों का स्वरूप तय करते हैं।

ऑल्डस हक्सले, 1894–1963

राजनीतिक भाषा इस तरह गढ़ी जाती है कि झूठ सच लगे और हत्या सम्मानजनक।

जॉर्ज ऑरवेल, 1903–1950

सत्ता साधन नहीं है; वह साध्य है।

जॉर्ज ऑरवेल, 1903–1950

यदि तुम भविष्य की तस्वीर चाहते हो, तो कल्पना करो कि एक जूता मानव चेहरे को कुचल रहा है — हमेशा के लिए।

जॉर्ज ऑरवेल, 1903–1950

स्वतंत्रता यह कहने की स्वतंत्रता है कि दो और दो चार होते हैं। यदि यह मान लिया जाए, तो बाक़ी सब अपने आप आ जाता है।

जॉर्ज ऑरवेल, 1903–1950

सभी जीवों के प्रति करुणा सही नैतिक आचरण की सबसे पक्की गारंटी है।

आर्थर शोपेनहावर, 1788–1860

अन्य संग्रह