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दुनिया बदलने वालों के शब्द: विचारक, वैज्ञानिक, लेखक और राजनेता।

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शिक्षा युवाओं के लिए लगाम है, बूढ़ों के लिए सांत्वना, ग़रीबों के लिए धन और अमीरों के लिए आभूषण।

डायोजनीज़, 412–323 ई.पू.

जंगली जीवों में सबसे बुरा दंश निंदक का है; पालतू जीवों में चापलूस का।

डायोजनीज़, 412–323 ई.पू.

जब उनसे पूछा गया कि लोग भिखारियों को भीख देते हैं पर दार्शनिकों को क्यों नहीं, तो उन्होंने उत्तर दिया कि उन्हें डर है कि वे स्वयं भिखारी बन सकते हैं, पर दार्शनिक कभी नहीं।

डायोजनीज़, 412–323 ई.पू.

सूर्य भी गंदी जगहों पर जाता है, पर मैला नहीं होता।

डायोजनीज़, 412–323 ई.पू.

तुमने दर्शन से क्या पाया? — और कुछ नहीं तो इतना तो: हर भाग्य के लिए तैयार रहना।

डायोजनीज़, 412–323 ई.पू.

मृत्यु बुरी कैसे हो सकती है, जब उसकी उपस्थिति में हमें उसका पता ही नहीं चलता?

डायोजनीज़, 412–323 ई.पू.

तुम्हें कौन-सी शराब पीना अच्छा लगता है? — वह जिसके पैसे दूसरे देते हैं।

डायोजनीज़, 412–323 ई.पू.

गुरु का मन किसी भी चीज़ पर एक क्षण के लिए भी नहीं रुकता।

ताकुआन सोहो, 1573–1645

यदि तुम अपनी आँख एक ही पत्ते पर टिका दोगे, तो बाक़ी सब नहीं देख पाओगे।

ताकुआन सोहो, 1573–1645

कार्य करो, पर मन को हर चाल के बारे में सोचने में क़ैद मत होने दो।

ताकुआन सोहो, 1573–1645

यदि तुम्हारा मन प्रतिद्वंद्वी की तलवार पर रुक जाता है, तो तुम कार्य करने की स्वतंत्रता खो देते हो।

ताकुआन सोहो, 1573–1645

मन को किसी एक जगह रुकने मत दो।

ताकुआन सोहो, 1573–1645

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