संग्रह
सूक्तियाँ
छोटे और तीखे विचार, जो एक ही वाक्य में सब कुछ कह देते हैं।
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साहस
पराजितों की एकमात्र रक्षा यही है कि वे किसी रक्षा की आशा न करें।
तिरस्कार: समझदार मनुष्य का उस शत्रु के प्रति भाव जो सुरक्षित रूप से सामना करने के लिए बहुत भयंकर है।
जिसके पास जीने का कोई क्यों है, वह लगभग हर कैसे को सह सकता है।
जो राक्षसों से लड़ता है, उसे सावधान रहना चाहिए कि वह स्वयं राक्षस न बन जाए।