संग्रह
सूक्तियाँ
छोटे और तीखे विचार, जो एक ही वाक्य में सब कुछ कह देते हैं।
128 सूक्तियाँ
इतिहास
सभ्यता ईश्वर की भूलों को सुधारने और उसके मज़ाक़ों पर रोक लगाने का साझा प्रयास है।
शांति: अंतरराष्ट्रीय मामलों में, लड़ाई के दो दौरों के बीच धोखे का एक दौर।
युद्ध: उस राजनीतिक गाँठ को दाँतों से खोलने का तरीक़ा जो जीभ से नहीं खुली।
जो राजा को मारता है और जो उसके लिए मरता है, दोनों समान रूप से मूर्तिपूजक हैं।