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सूक्तियाँ

छोटे और तीखे विचार, जो एक ही वाक्य में सब कुछ कह देते हैं।

128 सूक्तियाँ

बुद्धिमत्ता

चतुर दिखने की इच्छा अक्सर चतुर बनने से रोकती है।

फ़्रांस्वा द ला रोशफ़ूको, 1613–1680

पराजितों की एकमात्र रक्षा यही है कि वे किसी रक्षा की आशा न करें।

वर्जिल, 70–19 ई.पू.

जो समुद्र पार दौड़ते हैं, वे अपना आकाश बदलते हैं, अपनी आत्मा नहीं।

होरेस, 65–8 ई.पू.

प्रकृति को कुदाल से भी खदेड़ दो, वह लौट ही आएगी।

होरेस, 65–8 ई.पू.

आत्म-सम्मान: यह निश्चिंत भावना कि अभी तक किसी को शक नहीं हुआ।

एच. एल. मेंकेन, 1880–1956

यह मानना कठिन है कि कोई मनुष्य सच बोल रहा है, जब तुम जानते हो कि उसकी जगह तुम झूठ बोलते।

एच. एल. मेंकेन, 1880–1956

दूसरों के बारे में बुरा मानना पाप है, पर शायद ही कभी ग़लती।

एच. एल. मेंकेन, 1880–1956

अंतरात्मा: वह भीतरी आवाज़ जो हमें चेताती है कि शायद कोई देख रहा हो।

एच. एल. मेंकेन, 1880–1956

झूठे की ख्याति पाने का सबसे पक्का तरीक़ा है बहुत अच्छे होने का दिखावा करना। दूसरा सबसे पक्का तरीक़ा है बहुत बुरे होने का दिखावा करना।

एच. एल. मेंकेन, 1880–1956

ज्ञान का पहला क़दम है सबको दोष देना; अंतिम, सबसे मेल कर लेना।

गेओर्ग क्रिस्टोफ़ लिख़्टेनबर्ग, 1742–1799

साधारण मन हमेशा प्रचलित राय और प्रचलित फ़ैशन के अनुरूप चलता है।

गेओर्ग क्रिस्टोफ़ लिख़्टेनबर्ग, 1742–1799

यदि हम पूरी तरह जानते कि हम क्या चाहते हैं, तो हम कम ही चीज़ें तीव्रता से चाहते।

फ़्रांस्वा द ला रोशफ़ूको, 1613–1680

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