संग्रह
सूक्तियाँ
छोटे और तीखे विचार, जो एक ही वाक्य में सब कुछ कह देते हैं।
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बुद्धिमत्ता
पराजितों की एकमात्र रक्षा यही है कि वे किसी रक्षा की आशा न करें।
जो समुद्र पार दौड़ते हैं, वे अपना आकाश बदलते हैं, अपनी आत्मा नहीं।
आत्म-सम्मान: यह निश्चिंत भावना कि अभी तक किसी को शक नहीं हुआ।
यह मानना कठिन है कि कोई मनुष्य सच बोल रहा है, जब तुम जानते हो कि उसकी जगह तुम झूठ बोलते।
अंतरात्मा: वह भीतरी आवाज़ जो हमें चेताती है कि शायद कोई देख रहा हो।
ज्ञान का पहला क़दम है सबको दोष देना; अंतिम, सबसे मेल कर लेना।
साधारण मन हमेशा प्रचलित राय और प्रचलित फ़ैशन के अनुरूप चलता है।
यदि हम पूरी तरह जानते कि हम क्या चाहते हैं, तो हम कम ही चीज़ें तीव्रता से चाहते।