संग्रह

सूक्तियाँ

छोटे और तीखे विचार, जो एक ही वाक्य में सब कुछ कह देते हैं।

128 सूक्तियाँ

न्याय

शस्त्रों के बीच क़ानून मौन रहते हैं।

सिसेरो, 106–43 ई.पू.

यदि सभी सार्वजनिक प्रश्न पासा फेंककर तय किए जाएँ, तो उनमें से पचास प्रतिशत सही तय होंगे। यह अभी के हमारे परिणाम से पाँच गुना बेहतर होगा।

एच. एल. मेंकेन, 1880–1956

यदि दोष केवल एक पक्ष का होता, तो झगड़े देर तक नहीं चलते।

फ़्रांस्वा द ला रोशफ़ूको, 1613–1680

मुझे लोगों को दुष्ट देखकर कभी आश्चर्य नहीं होता, पर उन्हें लज्जित न देखकर अक्सर होता है।

जोनाथन स्विफ़्ट, 1667–1745

झूठ उड़ता है, और सत्य लँगड़ाता हुआ उसके पीछे आता है।

जोनाथन स्विफ़्ट, 1667–1745

अपील: क़ानून में, एक और बार फेंकने के लिए पासों को फिर डिब्बे में डालना।

एम्ब्रोस बियर्स, 1842–1914

राजनेता: उस बुनियादी कीचड़ की एक ईल मछली जिस पर संगठित समाज का ढाँचा खड़ा है।

एम्ब्रोस बियर्स, 1842–1914

वकील: क़ानून से बच निकलने में निपुण व्यक्ति।

एम्ब्रोस बियर्स, 1842–1914

मतदाता: वह व्यक्ति जिसे किसी और के चुने हुए आदमी को वोट देने का पवित्र अधिकार प्राप्त है।

एम्ब्रोस बियर्स, 1842–1914

राजनीति: निजी लाभ के लिए सार्वजनिक कार्यों का संचालन।

एम्ब्रोस बियर्स, 1842–1914

राजनीति: सिद्धांतों की प्रतियोगिता का वेश धरे हितों का संघर्ष।

एम्ब्रोस बियर्स, 1842–1914

हमेशा सही करो। इससे कुछ लोग प्रसन्न होंगे और बाक़ी चकित।

मार्क ट्वेन, 1835–1910

अन्य संग्रह