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दुनिया बदलने वालों के शब्द: विचारक, वैज्ञानिक, लेखक और राजनेता।

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हमारे पहले प्रयास पूरी तरह सहज होते हैं, एक जीवंत और अनुशासनहीन कल्पना की प्रेरणाएँ।

निकोला टेस्ला, 1856–1943

अंतिम लक्ष्य है भौतिक जगत पर मन का पूर्ण अधिकार और प्रकृति की शक्तियों को मानव की आवश्यकताओं में लगाना।

निकोला टेस्ला, 1856–1943

पर तोपोला के वीर, अमर काराद्जोर्दजे के मार्ग में हर बाधा खड़ी थी, फिर भी वह महान लक्ष्य तक पहुँचा: उसने जनता को उठाया, धरती का बपतिस्मा किया और बर्बर ज़ंजीरें तोड़ दीं, मृत सर्बों को पुकारकर जगाया और सर्ब आत्मा में प्राण फूँके।

पेटर द्वितीय पेट्रोविच न्येगोश, 1813–1851

यह संसार अत्याचारी के लिए भी अत्याचारी है, फिर किसी उदात्त आत्मा की तो बात ही क्या!

पेटर द्वितीय पेट्रोविच न्येगोश, 1813–1851

पर अत्याचार की गर्दन पर पैर रखना और उसे अधिकार की पहचान तक लाना, यही मनुष्य का सबसे पवित्र कर्तव्य है!

पेटर द्वितीय पेट्रोविच न्येगोश, 1813–1851

हर कोई केवल एक बार मरने के लिए जन्म लेता है; सम्मान और कलंक सदा जीवित रहते हैं!

पेटर द्वितीय पेट्रोविच न्येगोश, 1813–1851

संघर्ष निरंतर चलता रहे, जो नहीं हो सकता वह हो जाए!

पेटर द्वितीय पेट्रोविच न्येगोश, 1813–1851

मृत्यु के बिना पुनरुत्थान नहीं होता।

पेटर द्वितीय पेट्रोविच न्येगोश, 1813–1851

प्राणों का भय अक्सर सम्मान पर कलंक लगाता है।

पेटर द्वितीय पेट्रोविच न्येगोश, 1813–1851

जिसका क़ानून उसकी गदा में है, उसके पदचिह्नों से अमानुषता की गंध आती है।

पेटर द्वितीय पेट्रोविच न्येगोश, 1813–1851

वीरता हर बुराई पर सम्राट है, और आत्मा का सबसे मीठा पेय है, जिससे पूरी पीढ़ियाँ मतवाली होती हैं।

पेटर द्वितीय पेट्रोविच न्येगोश, 1813–1851

आज तक किसी ने शहद का प्याला नहीं पिया जिसे पित्त के प्याले ने कड़वा न किया हो।

पेटर द्वितीय पेट्रोविच न्येगोश, 1813–1851

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