संग्रह
लोक-ज्ञान, जो पीढ़ी दर पीढ़ी चला आ रहा है।
65 कहावतें
अधजल गगरी छलकत जाए।
नौ नक़द, न तेरह उधार।
एक से भले दो।
किताब को जिल्द से मत आँको।
सूत न कपास, जुलाहों में लट्ठम-लट्ठा।
बिना आग के धुआँ नहीं उठता।
हर चमकती चीज़ सोना नहीं होती।
कथनी से करनी भली।