संग्रह
लोक-ज्ञान, जो पीढ़ी दर पीढ़ी चला आ रहा है।
65 कहावतें
ग़लती करना मानवीय है।
पहले तोलो, फिर बोलो।
कुत्ते की दुम टेढ़ी की टेढ़ी।
इलाज से परहेज़ बेहतर।
बोलना चाँदी है, चुप रहना सोना।
दूध का जला छाछ भी फूँक-फूँककर पीता है।
जल्दी का काम शैतान का।
दान की बछिया के दाँत नहीं देखे जाते।
जो गरजते हैं, वे बरसते नहीं।
जो अंत में हँसता है, वही सबसे अच्छा हँसता है।
दो बार नापो, एक बार काटो।
झूठ के पाँव नहीं होते।