संग्रह
लोक-ज्ञान, जो पीढ़ी दर पीढ़ी चला आ रहा है।
65 कहावतें
जो अपने मुँह की चौकसी करता है, वह अपने प्राण की रक्षा करता है।
विनाश से पहले गर्व, और ठोकर खाने से पहले घमण्ड आता है।
बड़े धन से अच्छा नाम अधिक चाहने योग्य है।
सद्गुण कर्म में प्रकट होता है।
तू मिट्टी है और मिट्टी में ही मिल जाएगा।
स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मन।
ग़लती करना मानवीय है।
डूबते को तिनके का सहारा।
हर मनुष्य अपने भाग्य का निर्माता है।
अंत भला तो सब भला।
कुत्ते की दुम टेढ़ी की टेढ़ी।
ख़ून पानी से गाढ़ा होता है।