संग्रह
लोक-ज्ञान, जो पीढ़ी दर पीढ़ी चला आ रहा है।
65 कहावतें
तू मिट्टी है और मिट्टी में ही मिल जाएगा।
लगातार टपकती बूँदें पत्थर को भी काट देती हैं।
सब कुछ बदलता है, कुछ भी नष्ट नहीं होता।
आज का काम कल पर मत टालो।
जल्दी का काम शैतान का।
समय ही धन है।
समय हर घाव भर देता है।
रोम एक दिन में नहीं बना था।
गरम लोहे पर ही चोट की जाती है।
जो सोवत है सो खोवत है, जो जागत है सो पावत है।
देर आए, दुरुस्त आए।