संग्रह
लोक-ज्ञान, जो पीढ़ी दर पीढ़ी चला आ रहा है।
65 कहावतें
रोम एक दिन में नहीं बना था।
बिना मेहनत फल नहीं मिलता।
जैसे आया, वैसे गया।
नौ नक़द, न तेरह उधार।
बाप पर पूत, पिता पर घोड़ा, बहुत नहीं तो थोड़ा-थोड़ा।
एक से भले दो।
किताब को जिल्द से मत आँको।
गरम लोहे पर ही चोट की जाती है।
अभ्यास से ही कुशलता आती है।
आँख ओझल, पहाड़ ओझल।
सूत न कपास, जुलाहों में लट्ठम-लट्ठा।
बिना आग के धुआँ नहीं उठता।