संग्रह
लोक-ज्ञान, जो पीढ़ी दर पीढ़ी चला आ रहा है।
65 कहावतें
अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता।
ख़ून पानी से गाढ़ा होता है।
आज का काम कल पर मत टालो।
इलाज से परहेज़ बेहतर।
बोलना चाँदी है, चुप रहना सोना।
दूध का जला छाछ भी फूँक-फूँककर पीता है।
बिल्ली गई, चूहों की बन आई।
जल्दी का काम शैतान का।
जहाँ चाह, वहाँ राह।
दान की बछिया के दाँत नहीं देखे जाते।
जो गरजते हैं, वे बरसते नहीं।
प्रेम अंधा होता है।