संग्रह
छोटे और तीखे विचार, जो एक ही वाक्य में सब कुछ कह देते हैं।
128 सूक्तियाँ
महान होना ग़लत समझा जाना है।
हर मनुष्य अपनी दृष्टि की सीमाओं को संसार की सीमाएँ मान लेता है।
संदेह कोई सुखद अवस्था नहीं है, पर निश्चितता हास्यास्पद है।