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छोटे और तीखे विचार, जो एक ही वाक्य में सब कुछ कह देते हैं।

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शिष्टता: सबसे स्वीकार्य पाखंड।

एम्ब्रोस बियर्स, 1842–1914

युद्ध: उस राजनीतिक गाँठ को दाँतों से खोलने का तरीक़ा जो जीभ से नहीं खुली।

एम्ब्रोस बियर्स, 1842–1914

किफ़ायत: उस व्हिस्की के पीपे को ख़रीदना जिसकी तुम्हें ज़रूरत नहीं, उस गाय की क़ीमत पर जिसे तुम ख़रीद नहीं सकते।

एम्ब्रोस बियर्स, 1842–1914

पीठ पीछे बुराई: किसी आदमी के बारे में वैसा कहना जैसा तुम उसे पाते हो, जब वह तुम्हें नहीं पा सकता।

एम्ब्रोस बियर्स, 1842–1914

सुंदरता: वह शक्ति जिससे स्त्री प्रेमी को मोहित करती है और पति को भयभीत।

एम्ब्रोस बियर्स, 1842–1914

अहंकारी: घटिया रुचि वाला व्यक्ति, जिसे मुझसे ज़्यादा अपने में दिलचस्पी है।

एम्ब्रोस बियर्स, 1842–1914

शिक्षा: वह जो बुद्धिमानों के सामने उनकी समझ की कमी खोल देती है और मूर्खों से छिपा लेती है।

एम्ब्रोस बियर्स, 1842–1914

मतदाता: वह व्यक्ति जिसे किसी और के चुने हुए आदमी को वोट देने का पवित्र अधिकार प्राप्त है।

एम्ब्रोस बियर्स, 1842–1914

राजनीति: निजी लाभ के लिए सार्वजनिक कार्यों का संचालन।

एम्ब्रोस बियर्स, 1842–1914

राजनीति: सिद्धांतों की प्रतियोगिता का वेश धरे हितों का संघर्ष।

एम्ब्रोस बियर्स, 1842–1914

जो मनुष्य तर्क की सुनता है, वह खो जाता है: तर्क उन सबको दास बना लेता है जिनका मन उस पर शासन करने लायक़ मज़बूत नहीं।

जॉर्ज बर्नार्ड शॉ, 1856–1950

तर्कशील मनुष्य स्वयं को दुनिया के अनुकूल ढाल लेता है; तर्कहीन मनुष्य दुनिया को अपने अनुकूल ढालने में लगा रहता है। इसलिए सारी प्रगति तर्कहीन मनुष्य पर निर्भर है।

जॉर्ज बर्नार्ड शॉ, 1856–1950

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