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छोटे और तीखे विचार, जो एक ही वाक्य में सब कुछ कह देते हैं।
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स्वयं से प्रेम करना जीवन भर चलने वाले प्रेम-प्रसंग की शुरुआत है।
जो विदेशी भाषाएँ नहीं जानता, वह अपनी भाषा के बारे में कुछ नहीं जानता।
हर मनुष्य अपनी दृष्टि की सीमाओं को संसार की सीमाएँ मान लेता है।
पुस्तक एक दर्पण है: यदि उसमें बंदर झाँके, तो उसमें से कोई प्रेरित नहीं झाँक सकता।
जो राक्षसों से लड़ता है, उसे सावधान रहना चाहिए कि वह स्वयं राक्षस न बन जाए।