संग्रह
सूक्तियाँ
छोटे और तीखे विचार, जो एक ही वाक्य में सब कुछ कह देते हैं।
128 सूक्तियाँ
हास्य
सलाह लेना: पहले से तय किए गए रास्ते पर किसी और की असहमति ढूँढ़ना।
राजनेता: उस बुनियादी कीचड़ की एक ईल मछली जिस पर संगठित समाज का ढाँचा खड़ा है।
युद्ध: उस राजनीतिक गाँठ को दाँतों से खोलने का तरीक़ा जो जीभ से नहीं खुली।
पीठ पीछे बुराई: किसी आदमी के बारे में वैसा कहना जैसा तुम उसे पाते हो, जब वह तुम्हें नहीं पा सकता।
सुंदरता: वह शक्ति जिससे स्त्री प्रेमी को मोहित करती है और पति को भयभीत।
अहंकारी: घटिया रुचि वाला व्यक्ति, जिसे मुझसे ज़्यादा अपने में दिलचस्पी है।
शिक्षा: वह जो बुद्धिमानों के सामने उनकी समझ की कमी खोल देती है और मूर्खों से छिपा लेती है।
मतदाता: वह व्यक्ति जिसे किसी और के चुने हुए आदमी को वोट देने का पवित्र अधिकार प्राप्त है।