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सूक्तियाँ

छोटे और तीखे विचार, जो एक ही वाक्य में सब कुछ कह देते हैं।

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हास्य

राजनीति: निजी लाभ के लिए सार्वजनिक कार्यों का संचालन।

एम्ब्रोस बियर्स, 1842–1914

राजनीति: सिद्धांतों की प्रतियोगिता का वेश धरे हितों का संघर्ष।

एम्ब्रोस बियर्स, 1842–1914

प्रलोभन का कभी विरोध मत करो: सब कुछ परखो, जो अच्छा है उसे थामे रहो।

जॉर्ज बर्नार्ड शॉ, 1856–1950

दूसरों के साथ वह मत करो जो तुम चाहते हो कि वे तुम्हारे साथ करें। हो सकता है उनकी पसंद अलग हो।

जॉर्ज बर्नार्ड शॉ, 1856–1950

नौकरशाही कर्मचारियों से बनी है; अभिजात वर्ग मूर्तियों से; लोकतंत्र मूर्तिपूजकों से।

जॉर्ज बर्नार्ड शॉ, 1856–1950

सुनहरा नियम यह है कि कोई सुनहरा नियम नहीं होता।

जॉर्ज बर्नार्ड शॉ, 1856–1950

यदि तुम परिवार के कंकाल से छुटकारा नहीं पा सकते, तो उसे नचा ही दो।

जॉर्ज बर्नार्ड शॉ, 1856–1950

जो कर सकता है, वह करता है। जो नहीं कर सकता, वह सिखाता है।

जॉर्ज बर्नार्ड शॉ, 1856–1950

नए विचार वाला मनुष्य तब तक सनकी है जब तक उसका विचार सफल नहीं हो जाता।

मार्क ट्वेन, 1835–1910

जब संदेह हो, सच बोलो।

मार्क ट्वेन, 1835–1910

आदत आदत है, उसे कोई खिड़की से बाहर नहीं फेंक सकता, उसे एक-एक सीढ़ी फुसलाकर नीचे उतारना पड़ता है।

मार्क ट्वेन, 1835–1910

आइए, ऐसे जीने का प्रयास करें कि जब हम मरें, तो कफ़न-दफ़न करने वाला भी दुखी हो।

मार्क ट्वेन, 1835–1910

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