संग्रह
सूक्तियाँ
छोटे और तीखे विचार, जो एक ही वाक्य में सब कुछ कह देते हैं।
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हास्य
राजनीति: सिद्धांतों की प्रतियोगिता का वेश धरे हितों का संघर्ष।
प्रलोभन का कभी विरोध मत करो: सब कुछ परखो, जो अच्छा है उसे थामे रहो।
दूसरों के साथ वह मत करो जो तुम चाहते हो कि वे तुम्हारे साथ करें। हो सकता है उनकी पसंद अलग हो।
नौकरशाही कर्मचारियों से बनी है; अभिजात वर्ग मूर्तियों से; लोकतंत्र मूर्तिपूजकों से।
यदि तुम परिवार के कंकाल से छुटकारा नहीं पा सकते, तो उसे नचा ही दो।
नए विचार वाला मनुष्य तब तक सनकी है जब तक उसका विचार सफल नहीं हो जाता।
आदत आदत है, उसे कोई खिड़की से बाहर नहीं फेंक सकता, उसे एक-एक सीढ़ी फुसलाकर नीचे उतारना पड़ता है।
आइए, ऐसे जीने का प्रयास करें कि जब हम मरें, तो कफ़न-दफ़न करने वाला भी दुखी हो।