संग्रह
सूक्तियाँ
छोटे और तीखे विचार, जो एक ही वाक्य में सब कुछ कह देते हैं।
128 सूक्तियाँ
हास्य
जो काम परसों भी उतनी ही अच्छी तरह कर सकते हो, उसे कल पर कभी मत टालो।
‘क्लासिक’: वह पुस्तक जिसकी लोग प्रशंसा करते हैं और जिसे पढ़ते नहीं।
यदि आप अपने बच्चों की सारी समस्याएँ हल कर देंगे, तो उनके पास आपके सिवा कोई समस्या नहीं बचेगी।
इस दुनिया में मृत्यु और करों के सिवा कुछ भी निश्चित नहीं कहा जा सकता।
मनुष्य अकेला जानवर है जो शरमाता है। या जिसे शरमाने की ज़रूरत है।
दुनिया में केवल एक चीज़ चर्चा में होने से बुरी है, और वह है चर्चा में न होना।
स्वयं से प्रेम करना जीवन भर चलने वाले प्रेम-प्रसंग की शुरुआत है।
पुस्तक एक दर्पण है: यदि उसमें बंदर झाँके, तो उसमें से कोई प्रेरित नहीं झाँक सकता।