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सूक्तियाँ

छोटे और तीखे विचार, जो एक ही वाक्य में सब कुछ कह देते हैं।

128 सूक्तियाँ

हास्य

जो काम परसों भी उतनी ही अच्छी तरह कर सकते हो, उसे कल पर कभी मत टालो।

मार्क ट्वेन, 1835–1910

मित्रता का पवित्र भाव इतना मधुर, स्थिर, निष्ठावान और टिकाऊ होता है कि पूरे जीवन चलता है, बशर्ते उससे पैसे उधार देने को न कहा जाए।

मार्क ट्वेन, 1835–1910

‘क्लासिक’: वह पुस्तक जिसकी लोग प्रशंसा करते हैं और जिसे पढ़ते नहीं।

मार्क ट्वेन, 1835–1910

आशा अच्छा नाश्ता है, पर बुरा रात का भोजन।

फ़्रांसिस बेकन, 1561–1626

यदि आप अपने बच्चों की सारी समस्याएँ हल कर देंगे, तो उनके पास आपके सिवा कोई समस्या नहीं बचेगी।

दुश्को रादोविच, 1922–1984

इस दुनिया में मृत्यु और करों के सिवा कुछ भी निश्चित नहीं कहा जा सकता।

बेंजामिन फ़्रैंकलिन, 1706–1790

मनुष्य अकेला जानवर है जो शरमाता है। या जिसे शरमाने की ज़रूरत है।

मार्क ट्वेन, 1835–1910

दुनिया में केवल एक चीज़ चर्चा में होने से बुरी है, और वह है चर्चा में न होना।

ऑस्कर वाइल्ड, 1854–1900

स्वयं से प्रेम करना जीवन भर चलने वाले प्रेम-प्रसंग की शुरुआत है।

ऑस्कर वाइल्ड, 1854–1900

जिसे आज सुबह बेलग्रेड में जागने का सौभाग्य मिला, वह मान सकता है कि आज के लिए उसने जीवन में काफ़ी कुछ पा लिया।

दुश्को रादोविच, 1922–1984

पुस्तक एक दर्पण है: यदि उसमें बंदर झाँके, तो उसमें से कोई प्रेरित नहीं झाँक सकता।

गेओर्ग क्रिस्टोफ़ लिख़्टेनबर्ग, 1742–1799

सामान्य बुद्धि इतनी सामान्य नहीं होती।

वोल्तेयर, 1694–1778

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